विपस्सना के बारे में आजकल बहुत लोग खोजते हैं। बहुत बार लोग शिविर भी करते हैं । लेकिन बहुत सारे लोगों को भगवान बुद्ध जी के द्वारा बतायी हुई विपस्सना के बारे में नहीं मालूम। आखिर विपस्सना क्या है ? विपस्सना को करने के लिए क्या करना होगा ? विपस्सना ध्यान का पहला कदम क्या… (Read More)
ये विपस्सना के बारे में धर्म चर्चा का दूसरा भाग है। इसमें सूत्र देशनाओं के अनुसार बहुत सारे कारणों के बारे में बताया गया है। पिछले विपस्सना के धर्म चर्चा को देखकर लोग जो कुछ प्रश्न पूछे, उसका उत्तर भी इसमें दिया गया है ।
लोग बुद्ध के प्रति श्रद्धा-श्रद्धा कहते हैं, पर क्या आप जानते हैं कि श्रद्धा दो प्रकार की होती है, जिसमें से वास्तविक श्रद्धा क्या होती है…? वो आपको इस धर्म-चर्चा से समझ में आयेगा। श्रद्धा का स्वभाव क्या है…? भगवान बुद्ध के प्रति अटल श्रद्धा कैसे उत्पन्न कर सकते हैं..? उसके लिए क्या करना चाहिए..?… (Read More)
भगवान नाम का अर्थ क्या है ? सच्चा भगवान किसे कहते हैं ? बुद्ध को भगवान क्यों कहते है ? ‘भगवान’ वचन सबसे पहले किसके लिए इस्तेमाल हुआ ? गौतम बुद्ध महान कैसे बनें ? क्या आप महात्मा बुद्ध के बारे में जानना चाहते हैं ? क्या आप गौतम बुद्ध की संगती करना चाहते हैं… (Read More)
नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासम्बुद्धस्स नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासम्बुद्धस्स नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासम्बुद्धस्स धम्मचक्कप्पवत्तन सुत्त एवं मे सुतं एकं समयं भगवा बाराणसियं विहरति इसिपतने मिगदाये तत्र खो भगवा पञ्चवग्गिये भिक्खू आमन्तेसि। द्वे मे भिक्खवे अन्ता पब्बजितेन न सेवितब्बा। यो चायं कामेसु कामसुखल्लिकानुयोगो हीनो गम्मो पोथुज्जनिको अनरियो अनत्थसंहितो। यो चायं अत्तकिलमथानुयोगो दुक्खो अनरियो… (Read More)
1. शांत है इन्द्रियाँ उन श्रमणों की – मन भी है अत्यंत शांतचाहे बैठे हों या चलते हों – है आचरण परम शांतसंयंमित है आँखें, नीची नजरों वालें – अर्थसहित बात है करतेऐसे हैं मेरे श्रमणगण। 2. शरीर से होने वाले सारे कार्य – है परम पवित्रवाणी भी अत्यंत है निर्मल – नहीं भड़कता कोई… (Read More)
यानिध भूतानि समागतानि – भुम्मानि वा यानि व अन्तलिक्खे ।सब्बेव भूता सुमना भवन्तु – अथोपि सक्कच्च सुणन्तु भासितं ।। जो कोई प्राणी यहाँ उपस्थित है / धरती पर या आकाश मेंउन सबके कल्याण के लिए / हमारे इस कथन को भली प्रकार से सुनें । तस्मा हि भूता निसामेथ सब्बे – मेत्तं करोथ मानुसिया पजाय… (Read More)
आनापानसति ध्यान(अपने श्वास के प्रति सति-स्मृति) भगवान बुद्ध ने महा सतिपट्ठान सूत्र में आनापानसति ध्यान के बारे में ऐसा विस्तार किया है।” हे भिक्षुओं ! इस धर्म पर चलने वाला श्रद्धालु व्यक्ति इस शरीर के सत्य स्वभाव को बोध करते हुए शरीर के प्रति विपस्सना कैसे करता है ? हे भिक्षुओं ! इस धर्म पर… (Read More)
मैत्री साधना महग्गत चेतोविमुत्ति मै वैर से मुक्त होऊँ… मै क्रोध से मुक्त होऊँ… मै ईर्ष्या से मुक्त होऊँ… मै दुख-पीड़ा से मुक्त होऊँ… मै सदा सुखी होऊँ… सदा सुखी होऊँ… सदा सुखी होऊँ… सभी दुखों से मुक्त होऊँ मेरे समान मेरे आसपास में रहने वाले सभी प्राणी वैर से मुक्त हो… क्रोध से मुक्त… (Read More)
बुद्धानुस्सति ध्यान 1. वे भगवान बुद्ध जी अपने मन की राग, काम-वासना, क्रोध, गुस्सा, अहंकार, घमण्ड, मोह-माया, लालच आदि सभी चित्त विकारों को नष्ट कर दिये हैं। इस संसार में सभी मानव, देवता, ब्रह्म आदि इन चित्त विकारों से युक्त है, पर बुद्ध जी इन सारे चित्त विकारों को नष्ट कर दिये। इसलिए भगवान बुद्ध… (Read More)

