November 17, 2017 चाहे वह राजा हो या साधारण मनुष्य; वे सब तृष्णा अर्थात् इच्छा को बिना दूर किए ही मृत्यु की सागर में डूब जाते हैं। जीवन से बिदाई तो लेते हैं परन्तु बिना तृप्त हुये। इस लोक में कामभोगों से कोई तृप्त नहीं हो सकता।